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बाबूजी की सीख घमंड का कोई स्थान नहीं

दुनिया में कहावत है कि अनुभव अनमोल होता है, ऐसा मुझे मेरे स्वर्गवासी बाबूजी पंडित श्री मनीराम शर्मा (दिल में आज भी पास हैं) के लिए भी लगता है वो सदा कहते थे बेटा घमंड क्यू करते हो, तुम जो कमा रहे, ऊंचाई में जा रहे वो अपने लिए, किसी पद पर आसीन हुए अपने लिए, रुतबा बना अपने लिए तो फिर घमंड दुसरे से क्यू, जब हम खुद को सर्वोच्च और सर्वश्रेष्ठ समझ लेते हैं तो हमारे में अभिमान आ जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि हम ये सब अपने और अपने परिवार की खुशी के लिए करते हैं फिर घमंड किस बात का, आपको कोई भी सकारात्मक याद रखता है तो केवल आपके व्यवहार के कारण, पैसे और घमंड के कारण तो नकारात्मक याद रखेगा इसलिए विनम्र रहो, जितना हो सके साथ देने की कोशिश करो। हर इन्सान अपने घर में राजा है वो आपको तभी इज्जत देगा जब आप उसे व्यवहार से जीतोगे। बाबूजी की सीख आज तक काम आ रही। सबसे यही निवेदन है कि अपने बुजुर्गो का सम्मान करते हुए उनके अनुभव का लाभ उठाएं। जय हिन्द जय भारतीय संस्कृति 🙏🙏
प्रणाम बाबूजी

आपका अपना
रामचन्द्र शर्मा

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